रिश्ते जरुरत के

 कुछ दिनों से किसी  के इंतजार में यूही बैठा था 

शायद  उसे मेरी याद  आये तो बातें करूँगा 

लेकिन शायद मै ये भूल  गया की ये कलयुग है 

यहाँ रिश्ते बस जरुरत तक ही रहते है 

 

तू इंतजार क्यों करता है तू भी निकल 

चलने वालो को कोई न कोई मिल ही जाता है 

बस उन पुराणी बातो को बैठकर कभी यद् मत करना 

नहीं तो कित्ता भी मजबूत हो दिल , टूट तो जाता है 


यु ही अकेले बैठकर सहते रहोगे 

गम की बातें कहते रहोगे ,तो वक्त निकल जायेगा 

कलम उठा के लिखा डालो ,नया  इतिहास बन जायेगा 

इसी कहानी से निकल कर फिर तुम्हारी दुनिया में खशिया लाएगा 


-वेद प्रकाश यादव 



Comments